ग़ज़ल : 247 – परदेस में

देस से परदेस में आकर हुआ मैं ।। सेर भर से एक तोला भर हुआ मैं ।।1।। रेलगाड़ी जब से पाँवों से है गुज़री , सच में उस दिन से ही यायावर हुआ मैं ।।2।। कब रहा काँटा मैं ग़ुस्से...Read more