गूँगी तनहाई में चुपचाप जब मैं रहता हूँ !!

रौ में जज़्बात की तिनके से तेज़ बहता हूँ !!

लिखने लगता हूँ मैं तब शोक-गीत रो-रोकर ,

या कोई शोख़ ग़ज़ल गुनगुना के कहता हूँ !!

-डॉ. हीरालाल प्रजापति

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