एक कोंपल था पका पत्ता न था ,

शाख से अपनी वो फिर क्यों झर गया ?

हमने माना सबकी एक दिन मृत्यु हो ,

किंतु क्यों वह शीघ्र इतने मर गया ?

लोग बतलाते हैं था वह अति भला ,

रास्ते सीधे सदा ही वह चला  ,

रह रहा था जन्म से परदेस में ,

आज होटल छोड़ अपने घर गया ।।

-डॉ. हीरालाल प्रजापति

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