ग़मज़दा लोगों को क्यों मैं याद रहता हूँ ?

दर्द में भी जो मज़ा सा शाद रहता हूँ !!

अपने सीने में जकड़ लो बाँध लो कसके ,

ऐसी ही क़ैदों में मैं आज़ाद रहता हूँ !!

उसके क़ब्ज़े में मैं उसकी ज़िद की ख़ातिर सच ,

बाप होकर उसकी बन औलाद रहता हूँ !!

शह्र की उजड़ी हुई हालत पे मत जाओ ,

अब भी मैं तब सा यहाँ आबाद रहता हूँ !!

जाने क्यों उसकी ख़ुदी के इक सुकूँ भर को ,

होके अव्वल भी मैं उसके बाद रहता हूँ !!

वक़्त देखो जो मुझे दुत्कारते आए ,

बनके उनका ही मैं अब दामाद रहता हूँ !!

-डॉ. हीरालाल प्रजापति

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