कैसा ये अजीबोग़रीब मेरा जहाँ है ?

बरसात के मौसम में भी तो सूखा यहाँ है !!

सोना न , न चाँदी , न हीरे-मोती समझना

तालाब में ढूँढूँ मैं अपने पानी कहाँ है ?

-डॉ. हीरालाल प्रजापति

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