सच दोस्ती न रिश्तेदारी न प्यार है ।।

दुनिया में सबसे बढ़कर बस रोज़गार है ।।1।।

मंज़िल पे हमसे पहले पहुंँचे न क्यों वो फिर ,

हम पे न साइकिल भी उसपे जो कार है ।।2।।

सामाँँ है जिसपे ऐशो-आराम के सभी ,

है फूल उसी को जीवन बाक़ी को ख़ार है ।।3।।

बारूद के धमाके सा दे सुनाई क्यों ,

जब-जब भी उसके दिल में बजता सितार है ?4।

हर वक़्त रोशनी का है इंतिज़ाम यूंँ ,

रातों को भी वहांँ पर लगता नहार है ।।5।।

उतना है वह परेशाँँ , उतना ही ग़मज़दा ,

इस दौर में जो जितना ईमानदार है ।।6।।

( ख़ार = काँटा / नहार = दिन , दिवस )

-डॉ. हीरालाल प्रजापति

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