आँसू उनकी आंँखों का चश्मा है गहना है ।।

जिन लोगों का काम ही रोना रोते रहना है ।।

झूठ है रोने से होते हैं ग़म कम या फिर ख़त्म ,

ढोल बजाकर ये सच दुनिया भर से कहना है ।।

ख़ुशियों का ही जश्न मनाया जाता महफ़िल में ,

दर्द तो जिसका है उसको ही तनहा सहना है ।।

क्या मतलब मज़्बूती छत दीवार को देने का ,

आख़िर बेबुनियाद घरों को जल्द ही ढहना है। ।।

ज्यों ताउम्र हिमालय का है काम खड़े रहना ,

यूँँ ही गंगा का मरते दम तक बस बहना है ।।

क्यों नज़रें ना गाड़ें तेरे तन पर अंधे भी ,

क्यों तूने बारिश में झीना जामा पहना है ।।

-डॉ. हीरालाल प्रजापति

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