ग़ज़ल : 269 – आसव

 शुद्ध गंगाजल से आसव हो गया हूँ ।। शिव था बिन तेरे पुरा-शव हो गया हूँ ।। बुलबुलों से कोयलों से भी मधुर मैं , तुम नहीं तो मूक-नीरव हो गया हूँ ।। जानता हूँ तुम नहीं होओगे मेरे ,...Read more