कविता : नास्तिकता क्यों ?

धर्मभीरु भर घृणा से करते हैं आपस में बत । धर्म से च्युत ईश्वर से सर्वथा हूँँ मैं विरत ।। पूछते रहते हैं मैं क्यों नास्तिक हूँँ तो सुनो । पूर्णत: ध्यानस्थ होकर तथ्यत: सर्वस गुनो ।। किंतु यह भी...Read more