मरने पे या किसी के जन्मने पे नचेंगे ।।

जानूँ न क्यों वलेक लोग बाग जगेंगे ।।

तुम भी तमाशा देखने को रात न सोना ।।

मरने पे मेरे थोड़ा भी मायूस न होना ।।

31 दिसंबर मैं चीख़ दे ख़बर रहा ।।

01 जनवरी को जन्मा मैं नववर्ष मर रहा ।।

-डॉ. हीरालाल प्रजापति

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *