आपने करबद्ध हो हम को नमन शत-शत किया ।।

अपना नीलाकाश से भी उच्च मस्तक नत किया ।।

झुक गए प्रत्येक बाराती भी आगे आपके ,

आपने कुछ इस तरह उनका सुहृद् स्वागत किया ।।

कौन करता है किसी का आजकल अब इस तरह ।।

आपने सम्मान हमारा सच किया है जिस तरह ।।

सोचते हैं हम बहुत अभिभूत होकर आपका ,

यदि करें आभार का प्रकटीकरण तो किस तरह ?

– वर का पिता

– डॉ. हीरालाल प्रजापति

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