आकाश तड़ित सा लपक लपक दुश्मन पर गिर गिर काटेंगे ।।

यदि आज नहीं यदि अभी नहीं तो हम किस दिन फिर काटेंगे ?

अब आँख के बदले आँख नहीं ना हाथ हाथ के बदले में ,

अब तो अपनी इक उँगली भी कटती है हम सिर काटेंगे ।।

-डॉ. हीरालाल प्रजापति

 

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