बुलाके पास जो

आवारा क़िस्म कुत्ते को ,

खिलाके बिस्कुट और

सिर्फ़ एक हड्डे को ,

सुनाने बैठ गया

अपनी अनसुनी ग़ज़लें ,

अदब से वो भी खड़ा

हो गया था सुनने को ।।

-डॉ. हीरालाल प्रजापति

 

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