कि बेख़ौफ़ हो हम न डर देखते हैं ।।

मचल कर तेरी रहगुज़र देखते हैं ।।

तू दिख जाए खिड़की पे या अपने दर पर ,

तेरे घर को भर-भर नज़र देखते हैं ।।

-डॉ. हीरालाल प्रजापति

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