मेरे ग़ुस्से को फूँक – फूँक मत हवा दे तू ।।

मैं भड़क जाऊँ उससे पहले ही बुझा दे तू ।।

मैं बरस उट्ठा तो बहा के दुनिया रख दूँगा ,

अब्र को देख मेरे आस्माँ बना दे तू ।।

-डॉ. हीरालाल प्रजापति

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