किसी गिर पड़े को झपट कर उठाना ।।

किसी ज़ख़्म खाए को मरहम लगाना ।।

ये आदत तुम्हारी नहीं ताज़ा-ताज़ा ,

है ये शौक़ तुममें निहायत पुराना ।।

हमें सब पता है कि क्या माज़रा है ,

कि क्या मग़्ज़े सर में क्या दिल में भरा है ?

तुम्हारा ये हर वक़्त का मुस्कुराना ,

हमें सिर्फ़ लगता है ग़म का छुपाना ।।

-डॉ. हीरालाल प्रजापति

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *