लाकर कहीं से उनपे बादलों को छाऊँ मैं ।।

भरभर हिमालयों से बर्फ जल चढ़ाऊँ मैं ।।

गर्मी की दोपहर के सूर्य से वो जल रहे ,

सोचूँ किसी भी तरह से उन्हें बुझाऊँ मैं ।।

-डॉ. हीरालाल प्रजापति

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