मुक्तक : 900 – ग़म का छुपाना

किसी गिर पड़े को झपट कर उठाना ।। किसी ज़ख़्म खाए को मरहम लगाना ।। ये आदत तुम्हारी नहीं ताज़ा-ताज़ा , है ये शौक़ तुममें निहायत पुराना ।। हमें सब पता है कि क्या माज़रा है , कि क्या मग़्ज़े...Read more