मुक्तक : 901- बैठ जाता हूँ

मैं उनके सामने ख़ुद को गिराकर बैठ जाता हूँ ।। उठे सर को सलीक़े से झुकाकर बैठ जाता हूँ ।। मुझे सर पर बिठाने वो रहें तैयार लेकिन मैं , हमेशा उनके क़दमों में ही जाकर बैठ जाता हूँ ।।...Read more