मुक्तक : 902 – चकोरा

कब मेरी जानिब वो शर्माकर बढ़ेंगे यार ? जो मैं सुनना चाहूँ वो कब तक कहेंगे यार ? ज्यों चकोरा चाँद को देखे है सारी रात , इक नज़र भर भी मुझे वो कब तकेंगे यार ? -डॉ. हीरालाल प्रजापतिRead more