मुक्तक : 905 – तिरकिट

तिरकिट-धा-धिन-तिनक-धिन तबला बजा बजाकर ।। अख़बारी सुर्ख़ियों को पढ़-पढ़ सुना-सुनाकर ।। लेकिन वो अपने दर्दो- ग़म की कहानियों को , बेचे कभी न हरगिज़ आंँसू बहा बहा कर ।। -डॉ. हीरालाल प्रजापतिRead more