मुक्तक : 906 – बोलो न अहमक़

  जो बेमौत मारे गए या मरे ख़ुद , उन्हें तुम किसी हक़ से बोलो न अहमक़ !! गर इतना जो हो जाता दुनिया में शायद , ज़मीं ही फिर हो जाती जन्नत बिलाशक़ !! नदी-कूप पर होता प्यासों का...Read more