मुक्तक : 906 ( B ) – पत्तल

किस पाप की सख़्त सज़ा चुप ऐसे काट रहा है ? इतना भी है क्यों बेकस वो कभी जो लाट रहा है ? हैराँ हूँ कई पेटों का वो पालनहार ही आख़िर – क्यों ख़ुद भूख में जूठी पत्तल चाट...Read more