मुक्तक : 908 – गर्मी की दोपहर

लाकर कहीं से उनपे बादलों को छाऊँ मैं ।। भरभर हिमालयों से बर्फ जल चढ़ाऊँ मैं ।। गर्मी की दोपहर के सूर्य से वो जल रहे , सोचूँ किसी भी तरह से उन्हें बुझाऊँ मैं ।। -डॉ. हीरालाल प्रजापतिRead more