उनसे मिलकर हमको करना था बहुत कुछ रात भर ।।

कर सके लेकिन बहुत कुछ करने की हम बात भर ।।

नाम पर बारिश के बदली बस टपक कर रह गयी ,

हमने भी कर उल्टा छाता उसमें ली बरसात भर ।।

-डॉ. हीरालाल प्रजापति

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