दिल जोड़ने चले हो ठहरो ज़रा संँभलना ।।

टूटे हैं दिल हज़ारों इस दिल्लगी में वर्ना ।।

मासूमियत की तह में रखते हैं बेवफ़ाई ।

मतलब परस्त झूठी करते हैं आश्नाई ।

राहे वफ़ा में देखो यूँँ ही क़दम न धरना ।।

टूटे हैं दिल हज़ारों इस दिल्लगी में वर्ना ।। 

रुस्वाई, बेवफ़ाई, दर्दे जुदाई वाली ।

गुंजाइशें हैं इसमें ख़ूँ की रुलाई वाली ।

आसाँ नहीं है हरगिज़ इस राह से गुजरना ।।

टूटे हैं दिल हज़ारों इस दिल्लगी में वर्ना ।। 

मुमकिन नहीं मोहब्बत की जंग में बताना ।

मारेंगे बाज़ी आशिक़ या संगदिल ज़माना ।

आग़ाज़ कर रहे हो अंजाम से न डरना ।।

टूटे हैं दिल हज़ारों इस दिल्लगी में वर्ना ।। 

आग़ाज़े आशिक़ी में ख़तरा नज़र न आए ।

अंजाम ज़िंदगी पर ऐसा असर दिखाए ।

नाकामे इश्क़ को कई कई बार होता मरना ।।

टूटे हैं दिल हज़ारों इस दिल्लगी में वर्ना ।। 

-डॉ. हीरालाल प्रजापति

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