उनके लिए जो मारते हैं झक अभी भी हम ?

समझे नहीं ये बात आज तक , अभी भी हम ।।

उनको नहीं सुहाते फूटी आँख हम मगर !

उनको ही ताकते हैं एकटक अभी भी हम ?

-डॉ. हीरालाल प्रजापति

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