जब कभी तू हर इक शख़्स का ख़्वाब थी ,

तू मेरा भी थी मक़्सद , थी मंज़िल कभी ।।

आशिक़ों की तेरे जब बड़ी फ़ौज थी ,

उसमें चुपके से मैं भी था शामिल कभी ।।

तू न माने ज़माने के आगे तो क्या ;

है हक़ीक़त मगर तुझको सारी पता ;

मेरे दिल में तेरी इक बड़ी माँद थी ,

तेरे दिल में था मेरा भी इक बिल कभी ।।

-डॉ. हीरालाल प्रजापति

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *