हैरान हो रहे हो , मैं कल सा फिर पड़ा हूँ ?

हँसते ही हँंसते कैसे , अश्क़ों से घिर पड़ा हूँ ?

मैं आज भी नशे में हूँ पर नहीं नशे से ,

ठोकर किसी के धोख़े की खा के गिर पड़ा हूँ ।।

-डॉ. हीरालाल प्रजापति

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