मत हो हैराँ जान कर बेदिल ये सच है ,

एक बस हम ही नहीं सब मानते हैं ।।

जो भी सच्चा प्यार करते हैं जहाँ में ,

इश्क़ को ही ज़ात-ओ-मज़हब मानते हैं ।।

और तो और इश्क़ जब हद पार कर ले ,

माने आशिक़ को ख़ुदा महबूबा उसकी ;

और आशिक़ लोग महबूबा को अपनी ,

तह-ए-दिल से अपना इक रब मानते हैं ।।

-डॉ. हीरालाल प्रजापति

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