एक से बढ़कर हैं इक बुत , तुझसी मूरत कौन है ?

हुस्न की दुनिया में तुझसा ख़ूबसूरत कौन है ?

तू सभी का ख़्वाब , तू हर नौजवाँ की आर्ज़ू ,

ऐ परी ! लेकिन बता तेरी ज़रुरत कौन है ?

-डॉ. हीरालाल प्रजापति

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