ग़ज़ल : 286 – मानते हैं

इक उनका बुत बनाने मिट्टी को छानते हैं ।। अपना लहू मिलाकर फिर उसको सानते हैं ।। हैराँ न वो हमारे , रोने पे हो रहे हैं , हों मस्ख़रों को भी ग़म , शायद वो जानते हैं ।। मैं...Read more

मुक्तक : 949 – तक़दीर

पार जो करता हमें ख़ुद डूब वो बजरा गया रे ; अब अगर होगा लिखा तक़दीर में लगना कनारे – तो यक़ीनन ग़र्क़े दरिया हों कि उससे पहले आकर , देखना तिनके बचा लेंगे हमें देकर सहारे ।। ( बजरा...Read more

ग़ज़ल : 285 – बदनसीब हरगिज़ न हो

चोर हो , डाकू हो , क़ातिल हो , ग़रीब हरगिज़ न हो ।। आदमी कुछ हो , न हो बस , बदनसीब हरगिज़ न हो ।। ज़िंदगी उस शख़्स की , क्या ज़िंदगी है दोस्तों , गर जहाँ में...Read more

ग़ज़ल : 284 – पटक बैठीं

वे ग़फ़्लत में मेरे आगे ज़रा सा क्या मटक बैठीं ; मेरी तो बस के आँखों में , चुरा दिल , ले सटक बैठीं ।। मैं बारिश की तमन्ना में पड़ा था अब्र को तकते , खुली ज़ुल्फें वे कर...Read more

गीत : 54 – शिकस्ता दिल

यक़ीनन है शिकस्ता दिल जवाँ होकर भी वो वर्ना ।। न कहता नौजवानों से मोहब्बत-इश्क़ से बचना ।।1।। ख़ुुदा ने जब तुम्हें बख़्शी है सूरत चाँद से प्यारी ; तुम्हारा जिस्म जैसे राजधानी की है फुलवारी ; तुम्हें सिंगार से...Read more

मुक्तक : 948 – अदम आबाद

मत ज़रा रोको अदम आबाद जाने दो ।। हमको उनके साथ फ़ौरन शाद जाने दो ।। उनसे वादा था हमारा साथ मरने का , कम से कम जाने के उनके बाद जाने दो ।। -डॉ. हीरालाल प्रजापतिRead more