बाद जाने के तेरे तुझको पता क्या फिर से तेरे ,

लौटकर आने का रस्ता रात-दिन तकते रहेंगे ।।

और कुछ हरगिज़ न बोलेंगे कभी अपनी जुबाँ से ,

सिर्फ़ तेरा नाम ही ईमान से रटते रहेंगे ।।

सख़्त तनहाई हो या महफ़िल हो इससे बेअसर रह ,

हम तेरे दीदार के प्यासे किसी मानिंदे बुत ही ,

इक दफ़ा भी इक पलक झपके बिना तेरी क़सम रे ,

सिर झुका कर बस तेरी तस्वीर ही लखते रहेंगे ।।

-डॉ. हीरालाल प्रजापति

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *