चिलग़ोज़ा , काजू , बादाम से थोथा चना हुआ ।।

आग-आग से धुआँ-धुआँ सा कोहरा घना हुआ ।।

पूछ रहा है क्यों ? तो सुन ले सिर्फ़ोसिर्फ़ तेरे ;

हाँ ! तेरे ही इश्क़ में ज़ालिम मैं यों फ़ना हुआ ।।

-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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