तुम क्या जानो दुख पायल का ,

तुमको तो छन – छन से मतलब ?

चूड़ी कितनी चिटके – टूटे ,

तुमको बस खन – खन से मतलब ?

तुमको बस अच्छे लगते वो

मेंढक जो टर्राते हैं सच ।

गाने वालों  से ज़्यादा प्रिय

तुमको जो चिल्लाते हैं सच ।

तुमको कोयल की कूकें ,

बुलबुल के नग्में कब जँचते रे ?

टकराहट से निकले कर्कश –

स्वर ही तुमको भाते हैं सच ।

तुम क्या समझो ठुकती कीलों

के माथे की पीड़ा को हाँ ?

कितनी चोटें सहता घण्टा ?

तुमको बस टन – टन से मतलब ॥

चूड़ी कितनी चिटके – टूटे ,

तुमको बस खन – खन से मतलब ?

हर पल चौकन्ना रहता

बचता फिरता निश – भोर पवन से ।

कठिनाई से ख़ुद को रखता

दीप्त घिरा चहुंओर पवन से ।

वह उस पाटल की पंखुड़ियों सा

कोमल जो झड़ जाता रे ,

अश्वचलन से चलने वाली

अंधड़ सी घनघोर पवन से ।

तुमको साँय – साँय जो प्यारी

वो दीपक को हाहाकारी ,

तुम क्या जानो उसके भय को ?

तुमको बस सन – सन से मतलब ॥

चूड़ी कितनी चिटके – टूटे ,

तुमको बस खन – खन से मतलब ?

-डॉ. हीरालाल प्रजापति

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