बर्फ़ानी काली-रात दुपहरी का आफ़्ताब ॥

घनघोर अमावस में ऊग जाए माहताब ॥

दीवाने का हर्फ़-हर्फ़ लफ़्ज़-लफ़्ज़ हो सच बात,

चेहरे से इक ज़रा सा तू उठा दे गर नक़ाब ॥

-डॉ. हीरालाल प्रजापति 

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