सच ही था या कि जगती ,आँखों ने ख़्वाब देखा ।।
अच्छे-भले को लुक-छिप ,होते ख़राब देखा ।।
करता था रात-दिन जो ,पीने की हद बुराई ,
उसको ख़रीदते कल ,मैंने शराब देखा !!
-डॉ. हीरालाल प्रजापति

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