हरगिज़ नहीं करूँगा बात सादे आब की ।।
गंगो-जमन की और ना कभी चनाब की ।।
जब-जब भी प्यास का करोगे मुझसे ज़िक्र तुम ,
तज्वीज़ मैं करूँगा पेश बस शराब की ।।
-डॉ. हीरालाल प्रजापति

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