मुक्तक : 956 – होश

यूँ ही हमें न पागल , सब लोग-बाग कहते ।। बिन उज्र गालियाँ जो , चुपचाप रोज़ सहते ।। इक बात और दुनिया , मै पीके लड़खड़ाती , पीते नहीं हैं जब तक , हम होश में न रहते ।।...Read more