मुक्तक : 957 – ज़िंदा बने रहे

आँखों को लग गए थे , कुछ इस क़दर वो अच्छे , मरने तलक भी दिल में , ज़िंदा बने रहे थे ।। हम जितनी गर्मजोशी , से पेश आए उनसे , उतना वो हमसे मिलते , वक़्त अनमने रहे...Read more