क्या है वो , कैसी है वो , तारीफ़ में उसकी ,

हर कभी कब एकदम से ख़त उसे लिखता ?

हर कहीं पर बैठ भी कब जल्दबाज़ी में ,

कब तकल्लुफ़ को क़सम से ख़त उसे लिखता ?

दिल से दिन भर सोच कर तनहाई में शब भर ,

मैं चुनिंदा लफ़्ज़ सारे मग़्ज़ में भरकर ,

दौर-ए-मोबाइल में भी ख़ुद अपने हाथों से ,

काग़जों पर ही क़लम से ख़त उसे लिखता ।।

-डॉ. हीरालाल प्रजापति

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