मुक्तक : 967 – मैख़ाना

  [ चित्र Google Search से साभार ] कभी भी कम नहीं ज्यादा से ज्यादा चूमने जाता ।। मसालेदार छूने और सादा चूमने जाता ।। न हो हैरान सचमुच ही कभी पीनेे नहीं बस-बस , मैं मैख़ाने में बोतलबंद बादा...Read more

मुक्तक : 966 – तुम बिन

बर्फीली चट्टानों पर जा-जा लेटे दुनिया , पर अंगारों को छाती से चाँप रहा हूँ मैं !! लोग उघाड़े सब फिरते फर-फर झलते पंखे , स्वेटर पहने शॉल बदन पर ढाँप रहा हूँ मैं !! मेरी सुर्ख़ अँगीठी , मेरी...Read more