मुक्तक : 968 – ख़ुदकुश ( आत्महत्या करने वाला )

नाकामियों से अपनी , इक रोज़ यास में भर , सोचा कि आज तो कुछ , करके ही मैं रहूँगा ।। बेकार हूँ अगर मैं , तो फिर कोई बताए ; अब और आगे मर-मर , जीकर मैं क्या करूँगा...Read more