मुक्तक : 973 – याद

दुनिया की हर एक ख़ुशी , दुनिया भर का ग़म हो जाना ।। हँसते-हँसते मौसम का फिर , रोता आलम हो जाना ।। ऐसा ही होता है मेरे , साथ क़सम से बाज़ दफ़ा , याद तुम्हारी आना और बस...Read more