मुक्तक : 974 – सीख लूँगा

हमदर्द जब नहीं वो , अपना रहा तो अब से , हर दर्द उफ़ किए बिन , सहना मैं सीख लूँगा ।। गज़ भर ज़बान रखकर , भी धीरे-धीरे गूँगा – बन जाउँगा रे चुप-चुप , रहना मैं सीख लूँगा...Read more