तू पर्वत सा खड़ा अचल , सरिता सा बढ़-बढ़ जाएगा ।।
एक उठा पग तुंग शिखर , टीले जैसा चढ़ जाएगा ।।
मैं कविताओं का इक मोटा , ग्रंथ हज़ारों पन्नों का ,
एक पृष्ठ बस देख मेरा , फिर पूरा ही पढ़ जाएगा ।।
-डॉ. हीरालाल प्रजापति

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