■ मुक्तक : 978 – बड़ी बीमारियाँँ

दाने-दाने , पैसे-पैसे , के हैं जो मोहताज उनको , या बना दे मीर या फिर , इस तरह का कोई हल दे- राह में गिरकर पड़े इक , फूल को ज्यों कोई गाड़ी , अपने पहियों से गुजरकर ,...Read more