● ग़ज़ल : 291 – मत ठोंक-पीट मुझको

मत ठोंक-पीट मुझको , गर हो सके तो सहला ।। अब सह न पाउँगा मैं , सच वार कोई अगला ।। उनकी नज़र में था मैं , कल तक दिमाग़ वाला , हूँ आज एक अहमक़ , बेअक़्ल और पगला...Read more