■ मुक्तक : 982 – ख़्वाहिश

सावन में झूला झूल ज्यों , उठाएँ लुत्फ़ लड़कियाँ , उससे कहीं ज़ियादा ही , उठा रहे हैं वो मज़ा ।। जानूँ न किस बिना पे पर , सुना-सुना के रात-दिन , छोटी से छोटी बात पर , कड़ी से...Read more