■ मुक्तक : 985 – बातें

कट चुके हाथों से बातें , हो रहीं हैं , सच यही है ।। थक गए पावों से बातें , हो रहीं हैं , सच यही है ।। काटकर जबसे जुबाँ रख , दी गई है , ताक पर बस...Read more